NREGA Mobile Monitoring System : Version 3.7.2

अगर आपके गांव में मनरेगा का काम चलता है या आपके परिवार का कोई सदस्य MGNREGA में मजदूरी करता है, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। सरकार ने अब मनरेगा मजदूरों की हाजिरी लगाने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां एक साथ सभी मजदूरों की फोटो लेकर उपस्थिति दर्ज कर दी जाती थी, वहीं अब ऐसा नहीं होगा। अब हर मजदूर की अलग-अलग फेस स्कैनिंग होगी और उसके बाद ही हाजिरी लगेगी।

सरकार ने NMMS App Version 3.7.2 में यह नया अपडेट जारी किया है। इस बदलाव के बाद अब “No Face Scan, No Attendance” का नियम लागू माना जा रहा है। यानी अगर फेस स्कैन नहीं हुआ, तो मजदूर की हाजिरी भी नहीं लगेगी। यह बदलाव सुनने में थोड़ा बड़ा लग सकता है, लेकिन सरकार का कहना है कि इससे फर्जी हाजिरी और भ्रष्टाचार पर काफी हद तक रोक लगेगी।

आखिर NMMS App क्या है?

NMMS यानी NREGA Mobile Monitoring System एक सरकारी मोबाइल ऐप है जिसे खासतौर पर मनरेगा कार्यों की निगरानी के लिए बनाया गया है। इस ऐप के जरिए मजदूरों की उपस्थिति, काम की फोटो और साइट की जानकारी सीधे ऑनलाइन रिकॉर्ड की जाती है। गांव में जो मेट या सुपरवाइजर होते हैं, वही इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं।

पहले कई जगह ऐसी शिकायतें सामने आती थीं कि जो मजदूर काम पर नहीं आए, उनकी भी हाजिरी लगा दी गई। कुछ मामलों में तो फर्जी नामों पर भी भुगतान निकल जाता था। यही वजह है कि सरकार अब पूरी व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाना चाहती है।

पहले कैसे लगती थी हाजिरी?

पुराने सिस्टम में मेट एक साथ सभी मजदूरों को खड़ा करके ग्रुप फोटो लेता था। उसी फोटो के आधार पर सभी की उपस्थिति दर्ज हो जाती थी। देखने में यह तरीका आसान जरूर था, लेकिन इसमें कई कमियां थीं।

मान लीजिए किसी दिन 20 मजदूर साइट पर काम कर रहे हैं, लेकिन रिकॉर्ड में 25 लोगों की हाजिरी लग गई। ऐसे मामलों में सरकार को नुकसान होता था और असली मजदूरों का हक भी प्रभावित होता था। कई बार गांवों में लोग शिकायत करते थे कि बिना काम किए भी कुछ लोगों के नाम पर पैसा निकल रहा है।

यही कारण है कि सरकार ने अब यह नया फेस स्कैन सिस्टम लागू किया है।

अब कैसे लगेगी मजदूरों की हाजिरी?

अब NMMS App में हर मजदूर की अलग-अलग पहचान की जाएगी। मेट सबसे पहले ऐप खोलेगा और मजदूर का नाम सिलेक्ट करेगा। उसके बाद कैमरे के जरिए मजदूर का फेस स्कैन किया जाएगा।

अगर चेहरा सही तरीके से स्कैन हो गया और सिस्टम ने उसे पहचान लिया, तभी हाजिरी दर्ज होगी। यानी अब कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे की जगह हाजिरी नहीं लगा सकेगा।

सरल भाषा में समझें तो:

  • पहले ग्रुप फोटो से काम चल जाता था
  • अब हर मजदूर की अलग फेस स्कैनिंग होगी
  • बिना फेस स्कैन के अटेंडेंस नहीं लगेगी

यानी अब मनरेगा में पूरी तरह डिजिटल निगरानी शुरू हो चुकी है।

इस नए सिस्टम से क्या फायदा होगा?

सरकार का कहना है कि इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता होगा। अब फर्जी हाजिरी लगाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। जो मजदूर वास्तव में काम करेगा, उसी की उपस्थिति दर्ज होगी और उसी को भुगतान मिलेगा।

इससे मजदूरों को भी फायदा होगा क्योंकि कई बार गलत रिकॉर्ड की वजह से भुगतान रुक जाता था। अब सिस्टम ज्यादा सटीक तरीके से काम करेगा।

इसके अलावा सरकार को भी रियल टाइम डेटा मिलेगा कि किस गांव में कितने मजदूर काम कर रहे हैं और कौन-कौन साइट पर मौजूद है। इससे निगरानी मजबूत होगी और भ्रष्टाचार कम हो सकता है।

मजदूरों को किन बातों का ध्यान रखना होगा?

अब मजदूरों को काम पर जाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा। फेस स्कैन के दौरान चेहरा साफ दिखना जरूरी है। अगर चेहरा ढका हुआ है या रोशनी कम है, तो स्कैन में दिक्कत आ सकती है।

मजदूरों को समय पर साइट पर पहुंचना भी जरूरी होगा क्योंकि अब अटेंडेंस समय के अनुसार दर्ज की जा रही है। अगर फेस स्कैन नहीं हो रहा है तो तुरंत मेट को जानकारी देनी चाहिए।

कुछ जगहों पर नेटवर्क की समस्या भी आ सकती है। गांवों में इंटरनेट कमजोर होने की वजह से शुरुआत में थोड़ी परेशानी हो सकती है। लेकिन सरकार लगातार ऐप को अपडेट कर रही है ताकि सिस्टम और बेहतर तरीके से काम कर सके।

बुजुर्ग मजदूरों को हो सकती है परेशानी

इस नए सिस्टम को लेकर सबसे ज्यादा चिंता बुजुर्ग मजदूरों को लेकर जताई जा रही है। कई बार उम्र ज्यादा होने की वजह से फेस स्कैन सही तरीके से काम नहीं करता। वहीं धूप, धूल और खराब कैमरा भी परेशानी बढ़ा सकते हैं।

हालांकि सरकार और प्रशासन का कहना है कि धीरे-धीरे इन तकनीकी समस्याओं को ठीक किया जाएगा। आने वाले समय में यह सिस्टम और आसान बनाया जाएगा ताकि हर मजदूर बिना दिक्कत अपनी उपस्थिति दर्ज कर सके।

क्या यह बदलाव सही है?

अगर देखा जाए तो लंबे समय में यह बदलाव मनरेगा योजना के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। पहले जहां रिकॉर्ड में गड़बड़ी की शिकायतें आती थीं, अब डिजिटल सिस्टम से काफी हद तक पारदर्शिता बढ़ सकती है।

शुरुआत में थोड़ी परेशानी होना स्वाभाविक है, लेकिन जैसे-जैसे लोग इस तकनीक को समझेंगे, वैसे-वैसे यह सिस्टम आसान लगता जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य यही है कि सही मजदूर को सही समय पर उसका पैसा मिले और योजना में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।

निष्कर्ष

NMMS App Version 3.7.2 ने मनरेगा मजदूरों की हाजिरी प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। अब ग्रुप फोटो की जगह फेस स्कैनिंग से उपस्थिति दर्ज होगी। सरकार का दावा है कि इससे फर्जीवाड़ा रुकेगा, मजदूरों को सही भुगतान मिलेगा और पूरी योजना ज्यादा पारदर्शी बनेगी।

अगर आप भी मनरेगा में काम करते हैं, तो अब आपको इस नए नियम को समझना बहुत जरूरी है। आने वाले समय में यही डिजिटल सिस्टम मनरेगा की नई पहचान बनने वाला है।

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